दर्द
इतनी आसानी से इतनी आसानी से साथ छोड़ दिया तुमने - जैसे कभी कोई रिश्ता न था, मेरे आंसू, मेरी चाहत, मेरा दिल - कुछ कीमत समझता था इनकी, तुमने तोड़ा जो दिल वो सस्ता न था। अब समझने लगा हूं दुनिया को - सब दिल की हसरत मिटाते हैं, कोई राधा न रही, कोई सीता न रही जो प्यार के इंतजार में खुद को जलाते हैं। ~ अम्बरीष चन्द्र 'भारत'